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Tuesday, May 29, 2018

हम शहर के जाल में फस गए

हम शहर के जाल में फस गए 
हम 'बेचैन' होती 'ताल' में फस गए 
फस गए हम शहर के अकाल में , (लुप्त होते प्राकृतिक संसाधन )
फस गए धुँए के जाल में
फस गए हम शोर की बाढ़ में

सुकून नहीं मेरे गाँव जैसा, इस शहर में
इतमेनान (समय) नहीं बैठने का साथ मेें
जल्दी बहुत है सड़क पर,जैसे ऊपर जाने की होड़ हो
मतवाले से हैं जैसे हर तरफ सब

जल नहीं , प्रकाश नहीं, थोड़ा सा भी आकाश नहीं
प्रेम नहीं, भाव नहीं, थोड़ा सा भी चाव नहीं
रिश्ते हैं बेजनों से, कल कारखानों से , 
आते जाते सब रहे , उड़ती फुहाार की तरह

खबर नहीं बिखरते हुुुए खेेत की (भोजन और किसान की)
बहती हुई गरम रेत की (आता हुआ सूखा)
मिलते हुए संकेतों की , ओझल होती तमाम ज्योति की (लुप्त होती तमाम प्रजाती)

बस भीड़  है , भीड़ है , भीड़ है 
तमाम अस्पतालों में, होटल और मालों में
चोरी है, चकारी है झूठ है, मक्कारी है
नशा है, द्ववेेेश है, लूट है , कैसी ये.छूट है

हम शहर के जाल में फस गए
कहाँ इस दलदल में बस गये !
 
- अरविन्द

Sunday, April 3, 2016

हम कौन सी सदी ने पहुँच रहे हैं

हम कौन सी सदी ने पहुँच रहे हैं...??


न शुद्ध हवा है, न शुद्ध जल है, न जमीन शुद्ध न अन्न न फल ही शुद्ध है, न सेहत ही अच्छी है 
कुछ लोग कहते हैं हमने बहुत विकास कर लिया है !!

Sunday, December 27, 2015

चलने से कुछ नहीं होता !


लोग कहते हैं चलने से कुछ नहीं होता...!!

  रास्तों पर चलते चलते, "जिले और शहर" बदल जाते हैं...

 

शरीर से "जीवन" चला जाये....

 
...तो इंसान "जिन्दा" से "मुर्दा" हो जाता है !
   

Monday, November 2, 2015

शहर की दौड़ !




इस शोर में हम कहीं खो गए !
पैसे कमाने कि दौड़ में, इतना आगे निकल गए,
कि फिर शमशान में ही जा रुके !

आँसू निकले कि मौसम बदल गया




आँखों से आँसू निकले कि मौसम बदल गया !
ठंढ का मौसम बरसात में बदल गया !

शहर की जिंदगी एक लाश बन गई है !


शहर की जिंदगी एक लाश बन गई है,
न होश है, न ठिकाना, न मतलब है,
न परवाह, न खबर है, न इत्मेनान है 
दौड़ती ये जिंदगी की रफ़्तार कैसी ?? 
गिरते हैं कहर, फुर्सत नहीं मिलती मिलने की, 
पता भी नहीं होता,ये आखरी दौड़ है जिंदगी की, शमशान तक !!


भोर भाई शुभ आँखें खोलो


भोर भाई शुभ आँखें खोलो
लड्डू लाया हूँ मुंह धोलो

चिड़ियाँ गायें हैं चुन चुन चुन
पवन चले है सुर सुर सुर सुर

सूर्यकिरण निकली प्यारी सी
आसमान से छट गए हैं तारे

कोयल गा रही गीत है प्यारे
मंदिर में बज रहे शंख घंटाले

जागो अब, कबतक सोओगे
नहीं जागे तो पछ्ताओगे !

Monday, October 14, 2013

कुछ कदम सफ़र में पीछे छूट जाते हैं

कुछ कदम सफ़र में पीछे छूट जाते हैं ,

कुछ अपने हमसे सदा के लिए रूठ जाते है,

आँसू बनके वो याद आते हैं,

कभी दिन में तो कभी रातों में सताते हैं ||

Wednesday, July 1, 2009

जुदाई आपकी


जुदाई आपकी रुलाती रहेगी,
याद आपकी आती रहेगी,
जब तक है जिस्म में जान,
मेरी हर साँस प्यार निभाती रहेगी !