Monday, February 14, 2011

*CHEAK N MATE*


life is like game of chess in which many ups and downs,sorrows & hurdles come like a cheak on us;which we have to face & skip after skiping from these hurdles and sorrows we feel happy & again start life from a new end(move)
these
CHEAKS also CHECKS our patience & talent; but when the last & final CHEAK incidents on us it’s a MATE!
i.e THE END
of life !!
The soul leaves the old body & takes the new one to play a new game of lifeAGAIN!!!

दो आँसू रुक न सके

दो आँसू रुक न सके !

दो आँसू  रुक न सके दो पल के लिए...
दो पल रुक न सक इस दिल के लिए...
दिल तोड़ गए किसी की ख़ुशी के लिए...
वो हमें भूल गए किसी और के लिए...
हम तो इस उम्मीद में थे, कि वो आएंगे हमारी थोड़ी से ख़ुशी के लिए...
पर वो हमें छोड़ गए आँसुओं में बहने के लिए...
ये आँखें तरस गईं उनकी  एक झलक पाने के लिए...

जब याद आयेगी उनको हमारे गले लगने की और पलखों से निकल रहे होंगे आँसू...
तो हम न होंगे उनके दो आँसुओं  को रोक पाने के लिए...
- अरविन्द /@rvind!
 
Previously Posted at 5:43 AM on Tuesday, December 18, 2007

किसे भूलें किसे याद करें

किसे भूलें किसे याद करें किस किस से फ़रियाद करें ,किस से नफरत ,किस से प्यार करें ?
किस पे ये दुनिया जा निसार करें किस पत्थर पे कदम रक्खें, किसे छोड़ चलें ?
किसे बेकार किसे अनमोल कहें ,किसे छोड़ें ,किस के साथ चलें किसे हम दगाबाज़ किसे वफादार कहें ?
किस सुबह, किसे शाम कहें ? किसे खुशी किसे गम का दूसरा नाम कहें ?
किसे सूरज किसे चाँद कहें ,किसे पत्थर किसे भगवान कहें ?
किसे निशानी किसे निशान कहें किसे सुर किसे ताल कहें ?
किसे ज़िंदगी किसे ज़िन्दगी की आखरी शाम कहें ?
किसे पतझड़ किसे बसंत की बहार कहें ?
किसे नीलम किसे पत्थर बेकार कहें ?
किसे धरती किसे आकाश कहें ?
किसे सम्मान किसे अपमान कहें ?
किसे पूनम  पूनम का चाँद कहें ,किसे शान्त किसे अशान्त कहें ?
किसे नाम किसे बदनाम कहें ?
किसे जीवन का आखरी अंजाम कहें ?
किसे भूलें किसे याद करें...
kise bekar kise anmol kahen kise choden kis k sath chale kise ham dagabazz kise vafadaar kahen kise subha kise shyam kahen kise khushi kise gam ka dusra nam kahen kise suraj kise chand kahe kise patthar kise bhagwan kahen.
 
kise nishani kise nishan kahen kise sur kise tal kahen kise zindagi ki akhri sham kahen kise patjhad kise basant ki bahar kahen kise nelam kise pathar bekar kahen kise dharti kise aakash kahen kise samman kise apman kahen kise punam kise punam ka chand kahen kise shant kise ashant kahen kise nam kise badnam kahen kise jevan ka akhari anjam kahen...
kise bhulen kise yad karen...

@rvind
Previously Posted at 2:27 AM on Saturday, September 22, 2007

हम मिलते हैं मुस्कुराने के लिए

हम मिलते हैं मुस्कुराने के लिए


हम पास आते हैं कुछ पल साथ बिताने के लिए 
हम दूर जाते हैं फिर से पास आने के लिए 
हम गमों को भुलाते हैं जख्मों को भर जाने के लिए,
हम हँसी ख़ुशी बातें करते हैं खुशियों को बढ़ाने के लिए
हम गुस्ताखी करते हैं कुछ नसीहतें पाने के लिए

गम आते हैं खुशी को बुलाने के लिए 
हम मुस्कुराते हैं आपके चेहरे पे मुस्कुराहट लाने के लिए...


आप रूठ जाते हैं हमारे मानाने के लिए, 
हम आपको जोश दिलाते रहते हैं कुछ कर गुजर जाने के लिए हैं...


दोस्ती और प्यार नहीं बिकते हैं ख़रीदे जाने के लिए...

हर सुबह होती है जीवन में किसी नए सफर पर जाने के लिए...

जिन्दगी होती है जीवन में हमेशा आगे बढ़ते जाने के लिए...


मुस्कुराहट होती है मुस्कुराने के लिए...

- अरविन्द/@rvind


Previously Posted  at 12:26 AM on Friday, November 23, 2007

जख्म इधर है तो दर्द उधर भी होगा

जख्म इधर है तो दर्द उधर भी होगा,
दिल इधर है तो धड़कन उधर भी होगी,
प्यास इधर भी है तो जस्बात उधर भी होंगे,
काँटा इधर लगा है तो चुभन उधर भी होगी,
जुस्तजूं इधर है तो कशिश उधर भी होगी,
चिंगारी इधर है तो आग उधर भी होगी,
दर्द इधर है तो चोट उधर भी होगी,
जिन्दगी इधर है तो जीवन उधर भी होगा,
खुशबू इधर है तो फूल उधर भी होंगे...
 
गम इधर है तो उदास मन उधर भी होगा,
एक किनारा इधर है तो दूसरा उधर भी होगा,
आवाज इधर है तो शोर उधर भी होगा,
पल्खों में नमी इधर भी है तो एक आँसू  उधर भी झलका होगा,
तड़प इधर है तो जुदाई उधर भी होगी ,
साँस इधर है तो उनका एहसास उधर भी होगा,
चुलबुली इधर है तो गुदगुदी उधर भी होगी ,
लब इधर हैं तो उनकी मुस्कुराहट उधर भी होगी...

प्यार इधर है तो इजहार उधर भी होगा,
चाँद इधर है तो चाँदनी उधर भी होगी,
दूरियां इधर भी हैं तो नज़दीकियाँ उधर भी होगी,
दिल इधर टूटा है तो टुकड़े उधर भी बिखरे होंगे...

घुटन इधर हुई है ,तो साँसें उधर भी रुकी होंगी...
मौत इधर आई है तो जनाजा उधर भी निकला होगा...

- अरविन्द/@rvind

Friday, November 23, 2007