andaz-e-bayaan अंदाज-ए-बयाँ
Hal-E-Dil | हाल-ए-दिल,कविता शायरी हिन्दी में
Sunday, April 3, 2016
हम कौन सी सदी ने पहुँच रहे हैं
हम कौन सी सदी ने पहुँच रहे हैं...??
न शुद्ध हवा है, न शुद्ध जल है, न जमीन शुद्ध न अन्न न फल ही शुद्ध है, न सेहत ही अच्छी है
कुछ लोग कहते हैं हमने बहुत विकास कर लिया है !!
Sunday, December 27, 2015
चलने से कुछ नहीं होता !
लोग कहते हैं चलने से कुछ नहीं होता...!!
रास्तों पर चलते चलते, "जिले और शहर" बदल जाते हैं...
शरीर से "जीवन" चला जाये....
...तो इंसान "जिन्दा" से "मुर्दा" हो जाता है !
Monday, November 2, 2015
शहर की दौड़ !
इस शोर में हम कहीं खो गए !
पैसे कमाने कि दौड़ में,
इतना आगे निकल गए,
कि फिर शमशान में ही जा रुके !
आँसू निकले कि मौसम बदल गया
आँखों से आँसू निकले कि मौसम बदल गया !
ठंढ का मौसम बरसात में बदल गया !
शहर की जिंदगी एक लाश बन गई है !
शहर की जिंदगी एक लाश बन गई है,
न होश है, न ठिकाना, न मतलब है,
न परवाह, न खबर है, न इत्मेनान
है
दौड़ती ये जिंदगी की रफ़्तार कैसी ??
गिरते हैं कहर, फुर्सत नहीं मिलती मिलने की,
पता भी नहीं होता,ये आखरी दौड़ है
जिंदगी
की,
शमशान तक !!
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