Wednesday, July 1, 2009

सताने लगे अगर तुम्हें तन्हाई

सताने लगे अगर तुम्हें तन्हाई, ओढ़ लेना खुद को अपनी बाँहो में,
मुस्कुरा देना खुद को देखकर अपनी आँखों में 
समेट लेना पंखों को, उड़ने से पहले,
देख लेना, कहीं ये ख्वाब तो नहीं !

Tuesday, May 12, 2009

अगर मिलें न कभी तुम्हें हम

अगर मिलें तुम्हें कभी करीब हम,
लगे क्यों हैं तुमसे इतना दूर हम,
ढूढ़ लेना हमें अपने करीब में,
मिल जायेंगे बंद आँखों में
झलक आयेंगे बहते आंसुओ से...

अगर अलविदा कहो

अगर अलविदा कहो तो इंतजार है एक मुलाकात का,
अगर वादा करो तो इंतजार है आगली मुलाकात का,
अगर मिलने को कहो... तो इंतजार है उस रात का...

Monday, April 13, 2009

लम्बी रातों के पल


इन
लम्बी रातों के पल बीत  पाते नहीं हम रात भर उनका इंतजार करते हैं...मगर वो आते नहीं...

मालूम है वो नहीं पाएंगे मगर हम हैं...
कि
खुद को उनका इन्जार करने से रोक पते नहीं...

Thursday, April 2, 2009

तेरी याद


तेरी याद मुझे क्यों आती है, अक्सर तनहा होने पर,

आँखों को क्यों नम कर जाती है, तेरी याद मुझे क्यों आती है ?

फूलों के मौसम में पतझड़ क्यों दे जाती है ?

अक्सर खुश रहता हूँ पर उसमें एक अधूरी सी तस्वीर क्यों रह जाती है ?

चढ़ती ऊँची लहरें पल भर में उतर जाती हैं जब तेरी याद मुझे आ जाती है....